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बिहार की बाघिन ने भरी 'संरक्षण की उड़ान', IAF के विशेष विमान से बक्सा टाइगर रिजर्व भेजा गया

 Reported By: Nitish Chandra,  Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 30, 2026 11:32 pm IST,  Updated : Sep 30, 2026 11:38 pm IST

भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंची वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन, बिहार के इतिहास में पहली बार बाघ का अंतर्राज्यीय स्थानांतरण

बिहार की बाघिन ने भरी 'संरक्षण की उड़ान'- India TV Hindi
बिहार की बाघिन ने भरी 'संरक्षण की उड़ान' Image Source : REPORTER INPUT

पटना: बिहार के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर हवाई अड्डे से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया है। संरक्षण के उद्देश्य से बिहार से किसी बाघ को पहली बार दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। 

बाघिन को 29 सितंबर की शाम करीब 5 बजे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बेहोश कर रेडियो-कॉलर लगाया गया। आवश्यक पशु चिकित्सा एवं वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया गया। बाघिन को 30 सितंबर की सुबह लगभग 8 बजे बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। इस प्रकार बाघिन को बेहोश किए जाने से लेकर उसके नए संरक्षण क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई।

एनक्लोजर में रखा गया

बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन को फिलहाल विशेष रूप से तैयार किए गए एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उसके स्वास्थ्य, व्यवहार एवं नए वातावरण के अनुकूलन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। 2 अक्टूबर को उसे एनक्लोजर से बड़े वन क्षेत्र में छोड़े जाने की योजना है।

इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका

इस ऐतिहासिक अभियान को बिहार एवं पश्चिम बंगाल वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वायु सेना के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अभियान में वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों तथा दोनों राज्यों के मैदानी वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाघिन के सुरक्षित पकड़ने, रेडियो-कॉलर लगाने, सड़क मार्ग से गोरखपुर तक पहुंचाने, विशेष विमान से परिवहन तथा बक्सा टाइगर रिजर्व में सुरक्षित स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन एवं पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप की गई।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण तराई वन परिदृश्य का हिस्सा है और बिहार में बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से बिहार ने पहली बार अपने यहां के बाघ को दूसरे राज्य के संरक्षण कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत किया है। बता दें कि भारत में दुनिया के 70 फीसदी से अधिक बाघों को संरक्षण मिलता है। भारत सरकार ने बाघों के संरक्षण के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें प्रमुख है प्रोजेक्ट टाइगर। इन सबके बीच सबसे बड़ी समस्या यह है कि बाघों के लिए जंगल सिमटते जा रहे हैं जिससे इंसानों के साथ उनका संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। 

 

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